विपत्ति में एक दूसरे की मदद करना, यह भी ईश्वर की भक्ति से कम नहीं : श्रीमती योगिता तरारे
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उभरते सितारे मे 'भक्ति सागर'
नागपुर। किसी बच्चे के चेहरे पर एक मुस्कान भी ला दें तो, यह किसी पूजा से कम नहीं है। किसी भी तरह के कर्मकांड से बढ़कर मानवीय संवेदनाओं के साथ, विपत्ति में एक दूसरे की मदद करना, यह भी ईश्वर की भक्ति से कम नहीं। जो अनंत शक्ति कण-कण में सर्वव्यापी है, घट घट में समाई है, उसने कभी मानव मानव में भेद नहीं किया। यह जो जीवन हमें मिला है, इसकी सार्थकता अलौकिक प्रेम से भरी है। खुद भी खुश रहकर दूसरों की प्रसन्नता का कारण बनना, ईश्वर की भक्ति कहलाता है। यह विचार श्रीमती योगिता तरारे जी ने बच्चों और उनके अभिभावकों के बीच रखा।
विदर्भ हिंदी साहित्य सम्मेलन का नवोदित प्रतिभाओं को समर्पित उपक्रम 'उभरते सितारे' का आयोजन हिंदी मोर भवन के उत्कर्ष हॉल में किया गया। कार्यक्रम का विषय 'भक्ति सागर' के अंतर्गत ज्ञानवर्धक, मनोरंजन और संगीतमय प्रस्तुतियों से भरा रहा। कार्यक्रम में विशेष अतिथि के रूप में श्री साईं क्लीनिकल केयर से श्रीमती योगिता विजय तरारे जी उपस्थित थीं। इनका सम्मान संयोजक युवराज चौधरी और सहसंयोजिका वैशाली मदारे ने स्वागत वस्त्र तथा स्मृतिचिन्ह देकर किया। सर्वप्रथम, कार्यक्रम की प्रस्तावना रखते हुए, सहसंयोजिका वैशाली मदारे ने भक्ति सागर विषय पर सुंदर विवेचन कर सरल और मधुर जीवन शैली को आध्यात्मिक रूप से समझाया।
तत्पश्चात, बच्चों ने भी इस विषय पर अपने विचार रखते हुए अपने गीतों और नृत्य से सबका मन मोह लिया। जिसमें, मृणाल तेलरांधे, जिनिशा भोजवानी, मिनाक्षी केसरवानी और भव्या अरोरा ने बहुत सुंदर गीतों की प्रस्तुति दी। संपूर्णा रेमंडल और हिरण्या चरडे ने शानदार नृत्य से सबका दिल जीत लिया। मृणाल तेलरांधे ने बढ़िया कि बोर्ड वादन से मंत्रमुग्ध किया।
बच्चों की प्रस्तुतियों को उनके अभिभावकों के साथ-साथ प्रोफेसर डॉ. शालिनी तेलरांधे, नम्रता भोजवानी, मोनिका रेमंडल, दीपक भावे, दीप्ति योगेश चरडे और वेद प्रकाश अरोरा आदि ने बहुत सराहा। कार्यक्रम में प्रशांत शंभरकर ने सहयोग किया। कार्यक्रम का कुशल संचालन सहसंयोजिका वैशाली मदारे ने किया। एवं, उपस्थित सभी दर्शकों, कलाकारों और बच्चों का आभार संयोजक युवराज चौधरी ने अपने शब्दों में व्यक्त किया।