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भौतिक सुविधा और लोगों की खुशी की खातिर मानसिक सुकून से समझौता

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  विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस विशेष – 10 अक्टूबर  आज के युग में स्वार्थ, लालच, द्वेष, चरित्रहीनता, भ्रष्टाचार, नशाखोरी, मिलावटखोरी, प्रदूषण, भेदभाव और मनुष्य की असीमित इच्छाओं की पूर्ति के लिए चल रहा कभी न खत्म होने वाला संघर्ष जिंदगी का सुकून छीन रहा है। हर कोई अपने ख्वाबों को पूरा करने के लिए भेड़चाल में भाग रहा है। किसी के पास रोजगार नहीं, किसी के पास प्रेम नहीं, परिवार नहीं, चरित्रवान जीवनसाथी नहीं, निरोगी शरीर नहीं, संस्कारशील बच्चे नहीं, सहयोगी परिवार और मित्र नहीं, समय नहीं, नाम और शोहरत नहीं, कोई सहारा नहीं तो किसी के पास धन-दौलत नहीं। दुनिया में कोई भी व्यक्ति जीवन की सभी खुशियों, सुकून और सुख-सुविधाओं के साथ परिपूर्ण नहीं हो सकता। समस्याएं सभी के जीवन में होती हैं, लेकिन उनके कारण पूरे जीवन परेशान रहकर और डर-डरकर जीना उचित नहीं है। हमारे पास जो उपलब्ध है, उसे समाधान मानने के बजाय मनुष्य असंतोषी बनकर अपने जीवन को स्वयं ही कष्टमय बना रहा है। मनुष्य अपने जीवन में खुशी की परिभाषा बदल रहा है। वह दूसरों के दुःख में खुशी और दूसरों की खुशी में ईर्ष्या से भर जाता है। अपने स्व...