हिंगणा तहसील के आदिवासी किसानों को न्याय दो – पूर्व मंत्री रमेशचंद्र बंग
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राष्ट्रवादी कांग्रेस (श.प) पार्टी द्वारा जिल्हाधिकारी और उपवनसंरक्षक को सौंपा गया ज्ञापन
नागपुर/हिंगणा। हिंगणा तहसील के आदिवासी किसान कई तरह की समस्याओं का सामना कर रहे हैं, लेकिन शासन और प्रशासन उन्हें न्याय देने के बजाय कभी राजस्व तो कभी वन विभाग के कार्यालयों के चक्कर लगवा रहे हैं। ऐसे सभी आदिवासी किसानों को न्याय दिलाने के लिए राजस्व विभाग और वन विभाग की संयुक्त बैठक बुलाने की मांग पूर्व मंत्री रमेशचंद्र बंग के नेतृत्व में जिल्हाधिकारी नागपुर और उपवनसंरक्षक को ज्ञापन सौंपकर की गई।
हिंगणा तहसील में आदिवासी समाज की बड़ी संख्या में बस्तियां हैं। जंगलों के समीप रहने वाले ये आदिवासी पीढ़ियों से खेती कर रहे हैं, लेकिन शासन की अन्यायपूर्ण नीतियों के कारण उनकी खेती की जमीन पर 7/12 (सातबारा) पर महाराष्ट्र सरकार का नाम दर्ज है, जिससे किसानों को सरकारी योजनाओं और सुविधाओं का लाभ लेने में बाधा उत्पन्न हो रही है। ऐसे में सातबारा दुरुस्त कर किसानों को उनका हक दिलाने, जिन आदिवासी किसानों को अभी तक सातबारा नहीं मिला है, उन्हें उपलब्ध कराने, जंगली जानवरों द्वारा किसानों की फसल को होने वाले नुकसान का मुआवजा दिलाने, वन अधिकार अधिनियम के तहत मिली जमीन का सीमांकन कराने और वन पट्टे पर खेती कर रहे किसानों के मृतक पिता के वारिसों के नाम चढ़ाने जैसे अनेक मुद्दों पर चर्चा कर समाधान करने के लिए राजस्व विभाग और वन विभाग की संयुक्त बैठक आयोजित कर आदिवासी किसानों को न्याय देने की मांग ज्ञापन द्वारा की गई।
इस अवसर पर पूर्व मंत्री रमेशचंद्र बंग के साथ हिंगणा कृषि उत्पन्न बाजार समिति के सभापति बबनराव आव्हाळे, राष्ट्रवादी कांग्रेस शरदचंद्र पवार पक्ष के कृषि सेल के तहसील अध्यक्ष हनुमंत दुधबळे, नागाझरी ग्राम पंचायत के पूर्व सरपंच केशवराव राऊत और सीआरटी डीपी सामाजिक संस्था की विमल जाधव प्रमुख रूप से उपस्थित थीं।