'राधा के स्वयंवर' नाटक का सफल आयोजन
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नागपुर। विदर्भ हिन्दी साहित्य सम्मेलन का उपक्रम उड़ान महिला चेतना मंच द्वारा नाटक 'राधा का स्वयंवर' की शानदार प्रस्तुति विदर्भ हिन्दी साहित्य सम्मेलन के वार्षिक अधिवेशन मे रविवार 8 जनवरी को किया गया। जिसके जरिए बदलते समाज़ के विकारों पर ध्यान केंद्रित किया गया तथा नाटक के जरिए बढ़ते विकारों का विरोध किया गया। नाटक की लेखिका तथा निर्देशिका है पूनम तिवारी हिंदुस्तानी तथा इनका सहयोग किया सह-संयोजिका शशि तिवारी ने।
'राधा का स्वयंवर' में दर्शाया गया कि पाश्चात्य तथा भौतिकवादी की अंधी दौड़ में हम अनैतिकता का किस तरह से स्वागत कर रहे है। अभिनेता तथा अभिनय की दुनिया कैसे नई पीढ़ी को गुमराह कर रही है। नेताजन भी राष्ट्रनीति नहीं राजनीति करते है।स्वामी संत भी पैसो और ग्लैमर की दौड़ में पीछे नहीं है। डॉन को भी हीरो बनाकर पेश किया जा रहा है।
और यहीं कारण है की कलयुग की राधा ने अपनी व्यथा और अपनी दुखद कथा को रखते हुए एक सच्चे ,सरल, संस्कारी, सुशिक्षित आम आदमी का चयन किया। लेखिका पूनम तिवारी हिंदुस्तानी ने कहा " परिवर्तन जीवन का नियम है तथा शाश्वत सत्य भी है और बदलते परिवर्तन को हमे सहर्ष स्वीकारना भी चाहिए पर यदि परिवर्तन से समाज़ में विकारों की उत्पत्ति हो तो उसका हमें पुरजोर विरोध करना चाहिए।
इस नाटक के मुख्य कलाकार थे आभा आसुदानी, लतिका त्रिपाठी, गौरी सोनटके, युवरानी चुलबूले, रूचिता चुलबूले, सना गनिया खान, अनिरुद्ध सिंग्रू, पारस फूले, शाहीद परवीन, पियूश वाघमारे, स्तवन गवने,नालंदा इंदुरकर, अनुपम तिवारी, अरिहंत तिवारी, आयूश तिवारी, हितेश चोपरा, अनंतिका मिश्रा, बेबीनंदा रेवतकर, वंशिका गजबिए, निधि दलाल, सयाली तोमर, तारीक कौशर, इशान कौशर, अनिकेत तिवारी, विशाल खर्चवाल, दीपिका शर्मा। नाटक के स्वयंवर को बहुत सराहा गया तथा बड़ी तादाद में दर्शको ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।