अनिल सोले के नेतृत्व में कुलपति को ज्ञापन
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साहित्य रत्न अन्नाभाऊ साठे अध्ययन केंद्र एवं अभ्यास केंद्र स्थापित की मांग
नागपुर। राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज नागपुर विश्वविद्यालय में साहित्य रत्न, लोकशाहीर, सत्यशोधक अन्नभाऊ साठे के नाम पर एक अध्ययन केंद्र और अभ्यास केंद्र स्थापित करने की मांग को लागू नहीं कर रहे हैं।
अनिल सोले के माध्यम से उनके नेतृत्व में लहु सेना प्रमुख संजय कठाळे ने विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ। सुभाष चौधरी को एक ज्ञापन दिया गया।
अन्नाभाऊ साठे ने मराठी साहित्य में महान योगदान दिया है और उनके साहित्य ने सामाजिक जागरूकता और सामाजिक जागृति का एक बड़ा काम किया है।
वे एक विश्व स्तरीय लेखक थे जिन्होंने 38 गुणवत्ता के उपन्यास लिखकर मराठी साहित्य को समृद्ध करने में अहम योगदान दिया है। उनके उपन्यासों का 28 अंतरराष्ट्रीय भाषाओं में अनुवाद किया गया है और उनकी रचनाओं का 9 भारतीय भाषाओं में अनुवाद किया गया है।
अन्नाभाऊ साठे को साहित्य के क्षेत्र में विश्व - प्रसिद्ध साहित्यकार और मराठी कवि के रूप में जाना जाता है। अन्नाभाऊ साठे के जन्म शताब्दी वर्ष 2020 से 2021 वर्ष है।
उसी के कारण, अपने काम को ध्यान में रखते हुए, पुणे विश्वविद्यालय, डॉ बाबासाहेब अम्बेडकर मराठवाड़ा विश्वविद्यालय, शिवाजी महाराज कोल्हापुर विश्वविद्यालय, सोलापुर विश्वविद्यालय, नांदेड़ और साहित्य रत्न अन्नभाऊ साठे।
अन्नाभाऊ साठे के जन्म शताब्दी के अवसर पर, विश्वविद्यालय आयोग द्वारा निर्देशित नियमों के अनुसार महान व्यक्तित्वों के नाम पर एक अध्ययन केंद्र राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज नागपुर विश्वविद्यालय में शुरू किया जाना चाहिए।
शिष्टाचार बोर्ड का नेतृत्व ए. ए. अनिल सोले, लहु सेना प्रमुख संजय कठाले, भैयाजी चौबे, दीपक गायकवाड़, हर्ष काले। राजू सोरगिले, शिवा तायवाड़े, महेंद्र प्रधान, कमलेश निखड़े, पांडुरंग हिवराले, जितेंद्र डोंगरे, सचिंद्र पांडे, सुरेश कावले, शंकर वाघमारे, रूपवरजी संेश्वर, जितेंद्र गायकवाड़, जगदीश इंगले, राहुल हिवराले, आदि मौजूद थे।